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पाप करें और भुगतना ना पड़े यह ईश्वर कि न्याय व्यबस्ता के विपरीत है | कारण कोई अग्नि में हाथ डाले और मानलें कि हाथ को जलने से अल्लाह, या

आज मैं आप लोगों को एक विडिओ देने जा रहा हूँ, जो डॉ0जाकिर नाईक ने बहुत बार कहा है youtube में the semilarity of islam & hinduism { दा सेमिलारिटी

मांसाहार पर ऋषि दयानंद के विचार को सुनें ऋषि ने हवाला दिया है शास्त्र का, जिसमें 8 को पापी बताया गया है | इसमें सबसे पहला नाम उनका बताया कि

Mahender Pal Arya विष्णु प० जी आप ने ठीक कहा की मैं कौन हूँ यह आध्यात्त्मिक प्रशन है | जिस से आप कोसों दूर हैं | दूसरी बात है की

  हमारा नाम मानव है,इन्सान है,यह बात बिलकुल ठीकहै.हम अपने नामों को ढो रहे हैं, परन्तु  हमने यह जानने का प्रयास ही नही किया, कि आखिर हमारा नाम मानव किसलिए

सृष्टि के प्रथम से ही अनेकों महापुरुषों का आगमन हुवा अनेकों ऋषि महर्षि, और ऋषिकायें इसी धरती पर आयें, अनेकों मुनियों का भी आगमन हुवा,फिर महापुरुष भी आयें,सबने मानवता का

धरती पर मानव को परमात्मा ने सभी प्राणियों में सबसे उत्कृष्ट, प्राणी बनाया, सबसे ज्यादा जिम्मेदारी भी परमात्मा ने मनुष्यों को दिया | साथ ही साथ यह भी बताया मानव

[नोट : महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने जोधपुर से दि० ५ अगस्त १८८३ को उदयपुर नरेश महाराणा सज्जनसिंह के मन्त्री श्री किसन (कृष्ण) सिंह जी बारहठ को एक महत्त्वपूर्ण पत्र

ऋषि दयानंद सरस्वती जी ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश को लिखने में ना मालूम, कितने और किन किन पुस्तकों का अवलोकन किया होगा | और.नाजाने कितनी रातें विताये होंगे चिन्तन,

  اِنَّ رَبَّكُمُ اللّٰهُ الَّذِيْ خَلَقَ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضَ فِيْ سِتَّةِ اَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوٰى عَلَي الْعَرْشِ يُغْشِي الَّيْلَ النَّهَارَ يَطْلُبُهٗ حَثِيْثًا   ۙ وَّالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ وَالنُّجُوْمَ مُسَخَّرٰتٍۢ بِاَمْرِهٖ  ۭاَلَا لَهُ الْخَلْقُ وَالْاَمْرُ