ऋषि बोध उत्सव पर एक विशेष विचचार ||

|| ऋषि बोध उत्सव पर विशेष विचार ||
दयानन्द बोध मानाने वालों को बोध कहाँ हुवा ?
आजकल कई वाट्सअप ग्रुपों तथा फेसबुक पर स्वयंभू संन्यासी,लालवस्त्र धारी ,तथा कथित स्वामी अग्निवेश ॠषि दयानन्द का चित्र लगाकर आर्य समाज के मञ्चो से मुस्लिम परस्ती के गीत गा रहे हैं निवर्तमान उपराष्ट्रपति के विदाई बयान की प्रशंसा कर रहे हैं। इसके कारण अपरिचित व्यक्ति आर्य समाज की निंदा करता है क्या सभी आर्यों, आर्य समाजों को इस स्वामी अग्निवेश का सामाजिक व धार्मिक बहिष्कार नहीं करना चाहिए ?

सबसे बड़ी परेशानी की बात तो यह है की जिस अग्निवेश के साथ प्रथमसे रहरहे जगवीर advocate उर्फ़ स्वामी आर्यावेश बने वह सार्वदेशिक सभा के प्रधान बने फिर रहे हैं | और इन्ही अग्निवेश विचारों का समर्थन करते आ रहे हैं आर्य समाजी भी उन्ही आर्यवेश को समर्थन दे रहे हैं और भारत से ले कर अमेरिका तक आर्य सम्मलेन को सम्बोधित कर रहे हैं वह इसका विरोध होना चाहिए की नहीं ?

अग्निवेश तो प्रथम से वैदिक विचारों का विरोध करते आ रहे हैं कभी ईसाई का समर्थन करते, और कभी मुसलमानों का समर्थन करते हैं, और कभी नक्शालियों का समर्थन करते है |

इनके साथ जो रहे अथवा रह रहे हैं उन्हें आर्य समाजियों का समर्थन मिलना अथवा इनका आर्य समाज में हावी होना यह कौनसा आर्यों का काम हो रहा है यह ऋषि दयानन्द के विचारों का प्रचार हो रहा है, जिनका बोध उत्सव यह मना रहे हैं ?

क्या ऋषि दयानन्द बंदेमातरम बोलने का समर्थन किया था या विरोध ? पिछले दिनों कश्मीर में मुसर्रत पाकिस्तान जिन्दाबाद का नारा लगा रहा था उस समय भी यही अग्निवेश मुसर्रत के समर्थन में गिरिफ्तारी देने को कश्मीर पहुँचे थे |
यही आर्यवेश और मायाप्रकाश त्यागी यह सभी लोग उन्ही के समर्थन में बोल रहे हैं काम कर रहे हैं उन्ही के साथ |
इन सब का विरोध होना चाहिए अथवा मात्र अग्निवेश का ही विरोध में कोई कहेगा ? मरते दम तक स्वामी इन्द्रवेश ने अग्नि वेश का समर्थन नही किया क्या ? यह अनिल आर्य अग्निवेश का समर्थन नहीं करता उसका विरोध होना चाहिए या नहीं, यह आर्य समाज में सेंध लगाने का काम हो रहा हैं अथवा नहीं ?

इन सब का विरोध आर्य समाजी कहाँ कर रहे हैं, बल्कि आर्य लोग और चन्दा देकर उनको मालामाल कर रहे हैं ? आप ऋषिदयानन्द के विचारों का तथा वैदिक विचारों का समर्थन करने वाले किसे देख रहे हैं, अथवा वैदिक मान्यता को उजागर करते किसे देख रहे हैं ? यह सभी लोग तो वैदिक मान्यताओं का ABCD नहीं जानते है | यह आर्य समाजी शिवरात्रि मनाते हैं ऋषि बोध उत्सव के नाम से, पर इन्हें बोध कहाँ हुवा या कहाँ है वैदिक मान्यता या वैदिक परम्परा का ? सत्यार्थप्रकाश केस पर ही सब को परखा, आज जो लोग आर्य समाजी कहते हैं अपने को, सब को देखा उस केस के समय किसीका भी दर्शन नहीं मिला था |
सत्यार्थप्रकाश केस भी यही अग्निवेश का कराया हुवा था जिसे मैं उजागर किया इनकी ही पत्रिका वैदिक सार्वदेशिक के लेखों से |

चाहे वह दिल्ली की प्रतिनिधि सभा के कार्यकर्ता हो या आर्य युवापरिषद के नाम से आर्य समाज में फिर रहे हों अथवा यह आर्य निर्मात्री सभा के नाम से आर्य समाज की सम्पत्ति को देख रहे हों किसी का भी दर्शन नहीं था | चाहे वह अजमेर वाली दयानन्द जी की बनाई सभा हो कोई सामने नहीं आया | और सत्यार्थप्रकाश पर प्रतिवंध लगाने के लिए यही अग्निवेश ने दो मुसलमानों को सामने रख कर केस दायर किया था | यह सारा मैं अपनी लेखनी में अपनी पुस्तक में प्रमाण सहित लिखा हूँ | वैदिक सार्वदेशिक में मुझे निशाचर तक लिखा गया | और यह भी लिखा गया की सत्यार्थ प्रकाश केस को 30 हजारी कोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट लाया गया अपनी लीडरी चमकाने के लिए |

यह सभी बातों को मैं झेला हूँ इन्ही तथा कथित आर्य समाजी कहलाने वालों से, और भी बहुत कुछ देखा है, मैं कहाँ तक लिखूं और कहाँ तक बताऊ इन आर्य समाजी कहलाने वालों की बातें ? मैंने यह जाना की भले ही यह आर्य समाजी शिवरात्रि को ऋषि वोध दिवस के नाम से लोगों में प्रचार करते कराते होंगे | किन्तु इन बोध दिवस मनाने वालों का ही बोध अब तक नहीं हुवा और न प्रलय तक होने वाला है | इसका कारण यह आर्य समाजी कहलाने वाले ही ऋषि दयानन्द की मान्यता को अपने आचरण में नहीं उतारा ऋषि मान्यता के विरुद्ध यज्ञ करते हैं | ऋषि ने कहीं नहीं लिखा की त्रिय्मवकम =स्तुता मया मन्त्र से आहुति डालो, दयानन्द ने वेद पारायण यज्ञ 101 कुण्डीय यज्ञ करनेको कहाँ बताया है ?
आश्चर्य की बात यह भी है की ऋषि दयानंद ने को कर्मकांड की पुस्तकें आर्यों को दिया हैएक का नाम संस्कार विधि, दूसरा है पञ्च महा यज्ञ विधि | इसमें आहुति देने के लिए जिन मंत्रो का चयन किया है उसे न बोलकर यह आर्य समाजी कहलाने वाले अपने मनमानी मन्त्रों से आहुति देते और दिलवाते हैं, इन्हें रोकने वाला कोई नहीं | कहीं कोई स्वस्तिवचन और शांति प्रकरण के मन्त्रों से आहुति दे रहे हैं जब की यह मान्यता ऋषि दयानंद जी के नहीं है | ऋषि दयानंद के नाम से ऋषि बोध उत्सव मानाने के परमात्मा बोध कब देंगे ?
अगर इन्हें बोध होता तो दयानन्द मान्यता विरुद्ध कार्य न करते | बोध दयानन्द को हुवा मूर्ति असली शिव नहीं है, फौरन छोड़ दिया यहाँ तक की घर परिवार ही छोड़ असली शिव के तलाश में निकल पड़े | अगर इन तथा कथित आर्य समाजीयों को बोध होता तो आर्य समाज की सम्पत्ति पर काबिज कैसे होते ? दयानन्द ने तो बोध होने पर छोड़ दिया, और यह आर्य समाज की संपत्ति पर कब्ज़ा जमाये बैठे है कहीं मिठाई की दुकान खोली तो कहीं स्कुल खोल कर मकान किराये पर देकर पैसा उगा रहे हैं | इन्हें बोध कहाँ है, यह कब तलक अबोध बने रहेंगे ? =महेंद्रपाल आर्य=4 /3 /19