|| सत्य का ग्रहण असत्य का त्याग ही मानवता है || सुविज्ञानं चिकितुषे जनाय सच्चासच्च वचसि पस्पृधाते | तयोर्यत्सत्यं यतरद्रिजियः तदित्सोमो अवति हन्त्सयात || [अथर्व- ८|४|१२] सुविज्ञानं – उत्तम श्रेष्ठ

लोगों ने मानव कहला कर भी सत्य को नहीं माना = || सत्येन रक्ष्यते धर्म्मः- सत्य के द्वरा धर्मं की रक्षा होति है || अर्थात सत्य की सदा विजय होती

मियां ताहिर अली की चुनौती स्वीकार= महेन्द्रपाल आर्य की और से लिखित स्वीकृति || Tahir Ali Mahendar pal ji main aap se dharm ke mamle par baat Karna chahta hoon aur

वेद प्रचारक ही वीर होता है नयसीद्वति द्विषः क्रिनोष्युक्थ्शन्सिनः! नृभिः सुवीर उच्यते || [ऋग्वेद ६|४५|६] (इत् उ) सचमुच ही (द्विषः) शत्रुओ को (अति नयसी) तू दूर ले जाता है, शत्रुओं

इस सत्यता पर मुझसे कोई भी डिबेट करना चाहे बन्दा हाज़िर है | ना जाने लोग सत्य को ग्रहण क्यों नहीं करते ? सम्पूर्ण भारत में ऋषि मुनियों से लेकर

|| मेरे फेसबुक के मित्र मोनिका बोस जी के सवाल का जवाब || Monica Bose बस अपने पिता जी की फोटू पर केवल एक बार थूक कर दिखा दीजिए और