ब्राहमण्स्य मुखम् आसीत बाहुः राजन्य कृतः उरू तदस्य यद् वैश्यः पदभ्याम् शूद्रो अजायतः।   देखें यहाँ शब्द है ब्राह्मण मुख है समाज का | क्षत्रीय वाहू है समाज का |

https://www.youtube.com/watch?v=APlxf20uV58 क्या हम जाती उसे कहें, जो जाते जाते भी नहीं जाती ? महेन्द्रपालआर्य वैदिकप्रवक्ता वैदिक प्रचार प्रसार हेतु मेरी आर्थिक सहायता करें, आपका धन्यवाद: Bank Account: Mahender Pal Arya

क्या जाती वही होती, जो जाते जाते भी नहीं जाती ? आज मानव समाज को जाती के नाम पर किस प्रकार एक दुसरे से दूर किया जा रहा है यह