आज विशेष कर भारत वर्ष में,कई वर्षोंसे, कुछ आतंकवादी संगठनों द्वारा यत्र तत्र,हमला हो रहा उसका मुख्य कारण ही धर्म है | इसबात को कोई मानें या न मानें इसे

ऋषि दयानंद जी ने अपने अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश के अंत में, स्वमत्वव्यामन्तव्यप्रकाश प्रकरण में धर्म और अधर्म को समझाते हुए लिखते है : “धर्माधर्म” जो पक्षपातरहित, न्यायाचरण, सत्यभाषादियुक्त ईश्वराज्ञा,

सृष्टि के प्रथम से ही अनेकों महापुरुषों का आगमन हुवा अनेकों ऋषि महर्षि, और ऋषिकायें इसी धरती पर आयें, अनेकों मुनियों का भी आगमन हुवा,फिर महा पुरुष भी आयें,सबने मानवता

हम भारत वासियों ने सत्य को स्वीकार ही कहाँ किया ? हमें जो पाठगलत पढाया गया आज तक उसी को हम रटे जारहे हैं, उसे सुधार ने का प्रयास कभी



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मुस्लिम नरनारी तीन तलाक के विरोध में कोलकता से दिल्ली तक |

वेद ही ईश्वरीय ज्ञान क्यों वेद में मिलावट संभव क्यों नहीं ?

कुवां अन्य के गिरने को खोदते हैं लोग, गिरते खुद है |

दुनिया वालों बाईबिल में अकल का प्रयोग हुवा या नहीं देखें |

ऋषि दयानन्द का अनुसरण ही राष्ट्र को दिशा दे सकता है |

ईश्वरीय ज्ञान की कसौटी पर डॉ0 जाकिर नाईक के पुस्तक का दिया गया जवाब | VDO

कौन थे वह ऋषि जिन्हीं ने मानव मात्र को 5 महायज्ञ करना बताया |

कौन थे वह ऋषि दयानन्द जिन्हें लोग नहीं जानते ?

बंगला भाषियों के प्रार्थना पर धर्म और मत में भेद को बताया गया, बंगला में =

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