हमारा नाम मानव है,इन्सान है,यह बात बिलकुल ठीकहै.हम अपने नामों को ढो रहे हैं, परन्तु  हमने यह जानने का प्रयास ही नही किया, कि आखिर हमारा नाम मानव किसलिए

सृष्टि के प्रथम से ही अनेकों महापुरुषों का आगमन हुवा अनेकों ऋषि महर्षि, और ऋषिकायें इसी धरती पर आयें, अनेकों मुनियों का भी आगमन हुवा,फिर महापुरुष भी आयें,सबने मानवता का

धरती पर मानव को परमात्मा ने सभी प्राणियों में सबसे उत्कृष्ट, प्राणी बनाया, सबसे ज्यादा जिम्मेदारी भी परमात्मा ने मनुष्यों को दिया | साथ ही साथ यह भी बताया मानव

[नोट : महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने जोधपुर से दि० ५ अगस्त १८८३ को उदयपुर नरेश महाराणा सज्जनसिंह के मन्त्री श्री किसन (कृष्ण) सिंह जी बारहठ को एक महत्त्वपूर्ण पत्र