आर्य समाज के संस्थापक ऋषि दयानन्द ने अपने कालजयी ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश के अन्तमें स्वमंताव्यामंताव्य्प्रकाश: में क्या लिखा है आर्य कहलाने वालो कभी पढ़ कर देखा भी ? ऋषि लिखते

इस देश का नाम आर्यवर्त था है, और रहेगा, जिसका प्रमाण हमारे ऋषि और मुनियों ने अनेक बार अनेक प्रकार से दिया है | ऋषि दयानन्द जी ने भी अपने