[नोट : महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने जोधपुर से दि० ५ अगस्त १८८३ को उदयपुर नरेश महाराणा सज्जनसिंह के मन्त्री श्री किसन (कृष्ण) सिंह जी बारहठ को एक महत्त्वपूर्ण पत्र

ऋषि दयानंद सरस्वती जी ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश को लिखने में ना मालूम, कितने और किन किन पुस्तकों का अवलोकन किया होगा | और.नाजाने कितनी रातें विताये होंगे चिन्तन,

  اِنَّ رَبَّكُمُ اللّٰهُ الَّذِيْ خَلَقَ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضَ فِيْ سِتَّةِ اَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوٰى عَلَي الْعَرْشِ يُغْشِي الَّيْلَ النَّهَارَ يَطْلُبُهٗ حَثِيْثًا   ۙ وَّالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ وَالنُّجُوْمَ مُسَخَّرٰتٍۢ بِاَمْرِهٖ  ۭاَلَا لَهُ الْخَلْقُ وَالْاَمْرُ 

सुबह एक खुश खबरी आप सभी मित्र मण्डली को देता हूँ, आप सभी देख और सुनरहे हैं हर TV चेनल से ले कर प्रायः अखबारों में इस समय धर्मान्तरण पर

भारत वासियों के मेहनत की कमाई से भारत सरकार उन देश द्रोहियों को पालते आ रही है जो हमारे देश के खिलाफ नारा लगारहे हमारे सैनिकों को मार रहे।  


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