अंग्रेजो के सामने अंगरेजी राज्य का विरोध करने वाले ऋषि दयानन्द ही थे|

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अंग्रेजो के सामने अंगरेजी राज्य का विरोध करने वाले ऋषि दयानन्द ही थे |
देश का दुर्भाग्य है की आज तक सम्पूर्ण भारत वासी ही ऐसे महर्षि को नहीं जान पाए, यह गलती किन लोगों की है ?

क्या आर्य समाज के सम्पत्ति पर कुंडली मारकर बैठने वालों का यह दायित्व नहीं बनता था की भारत वासियों को ऋषि दयानन्द के किये कार्यों की जानकारी कराते ?

ऋषि दयानन्द के मन्तावों को उनके द्वारा बताये गये वैदिक विचारों को अगर आर्य समाज के अधिकारी भारत भर पहुँचा देते तो शायद यह शाहिंबाग दिल्ली का नहीं होता, और न ईसाई मिशनरी भारत में हिन्दुओं को ईसाई बना पाते |