ऋषि दयानन्द ने वेदका पढना पढ़ना सुनना सुनाना परम धर्म बताया,आज संपत्ति कबजाना ही है |

https://youtu.be/fXV_vOFDtgQ
आर्य समाजी कहलाने वाले अगर ऋषि दयानन्द की बातों को मानकर उसपर अमल करते तो आज गैर आर्यों का बरक्स्यो या दबदबा नहीं होता |
आज सम्पूर्ण भारत में जो कुच्छ भी विघटन हो रहा है जनमांस में, उनके पास सत्य न पहुंचने के कारण |
दयानन्द जी ने 1875 में आर्यों को बताया था, तुम अपना परम धर्म को निभाना | स्वामी जे ने जिसे परम धर्म बताया, आर्य समाजी उसे छोड़ संपत्ति पर काबिज होने को ही परम धर्म मान लिया,नतीजा सबके सामने है |



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