धरती पर फैले एक भी मत पंथ सत्य नहीं है, सत्य दो नहीं होता |

https://youtu.be/c0J9EZECGLU
यह परम्परा शास्त्रार्थ की ऋषिदयानद की है 1866 में पादरियों से ऋषि दयानन्द की राजस्था में हुई थी |
इस विडिओ को सुनिए और विचार करें की सत्य के निर्णय के लिए यह ज़रूरी हैं अथवा नहीं ?