मेरे सिखाये बच्चे किस प्रकार कार्य कर रहे हैं सुनिए |

सत्य सनातन वैदिक धर्म ही मानव मात्र का धर्म है | यहाँ न किसी जाति का नाम ना किसी वर्ग का नाम और ना किसी मुल्क का नाम यहाँ सम्पूर्ण मानव कहलाने वालों के लिए परमात्मा का उपदेश है |

उसी को वेद ज्ञान कहते हैं, परमात्मा ने ऋषियों के द्वारा मानव मात्र को दिया है | जो हर सृष्टि के प्रथम में -ऋषि 4 ही होते हैं, अग्नि = वायु = आदित्य = अंगीरा ही नाम होता है | जिन ऋषि द्वारा ऋग्वेद = यजुर्वेद = सामवेद = और अथर्वेद = के नाम से होता है | इसमें -ज्ञान काण्ड = कर्म काण्ड = उपासना काण्ड = और विज्ञानं काण्ड = के नाम से मानव मात्र को दिया है बिना भेद भाव के |
यहाँ यह नहीं बताया गया कुरान जैसा की -ए ईमान लेन वालो = यह शब्द वेद में कहीं नहीं आया = की यह किसी मानव विशेष के लाये = कारण इश्वर पर पक्षपात का दोष लगता | यही कारन है की यह कल्याणी वाणी मानव मात्र के कल्याण के लिए हैं बताया गया | 16 /5 /19 =